Bollinger Band Kya Hai Hindi |बोलिंगर बैंड से Intraday Trading कैसे करते हैं

तो फ्रेंड्स आज चर्चा का विषय है बोलिंगर बैंड Bollinger Band Kya Hai Hindi के ऊपर Bollinger Band क्या हैं हिंदी | बोलिंगर बैंड से Intraday Trading कैसे करते हैं ? एक तकनीकी best intraday trading strategy का उपयोग करते हुए हैम शेयर बाजर ( Share Bazar ) में अच्चा खासा मुनफा कर सकत है। याह बात आप सब जन्ते हैं के बोलिंगर बैंड इंडिकेटर (bollinger band indicator) को indian stock market और forex market में important बहूत जियादा और  उपयोग भी किआ जता है। इंडिया शेयर बाजार थता फॉरेक्स मार्केट में बोलिंगर बैंड की विशेषता की ऊपर अगर हम बात करें तो बोलिंगर बैंड की विशेषता के साथ उसमें कुछ गलतिया भी हमें दिखाएं देती है। जैसे बोलिंगर बैंड में कभी-कभी फॉल्स सिग्नल भी देखने को मिलता है। अक्सर हम ऐसी फॉल्स सिग्नल को हम प्राप्त करते हैं। तो ऐसी फॉल्स सिग्नल से बचने के लिए कुछ विशेष जानकारी होना जरूरी है। अब हम बोलिंगर बैंड की सेट उप bollinger band settings के ऊपर चर्चा करेंगे। बोलिंगर बैंड की जो सेट अप है वह कुछ इस तरीके से जैसे बोलिंगर बैंड में फील्ड है फील्ड में आप कुछ भी सेट आप कर सकते हैं फील्ड सेट अप में ओपन, हाई, लौ, क्लोज, हायर लौ टू, हाई लौ क्लोज ३, हाई लो क्लोज फॉर, ओपन हाई लौ ४, यह सारे ऑप्शन आपको मिल जाएगा फील्ड सेट उप में। यह जो सेटअप है ऐसा कोई जरूरी नहीं है के ऑल सॉफ्टवेयर में एक जैसा रहेगा। लेकिन अगर डिफॉल्ट सेटअप की बात करें तो क्लोज रहता है फील्ड में। अब हम चर्चा करेंगे पीरियड के ऊपर। बॉलिंगर बेंड मैं पीरियड का बहुत ही महत्व है जैसे पीरियड में २०, २५, २३, ५०, कोई भी पीरियड आप अप्लाई कर सकते हैं।  लेकिन 20 पीरियड डिफॉल्ट सेट अप रहता है। Bollinger Band Kya Hai Hindi

अब चर्चा करेंगे स्टैंडर्ड देविएशन्स के ऊपर स्टैंडर्ड देविएशन्स डिफॉल्ट दो रहते हैं। नेक्स्ट मूविंग एवरेज टाइप मिलेगा, moving एवरेज टाइप में कुल ११ ऑप्शन मिलेगा जैसे सिंपल, एक्स्पोनेंशियल, टाइम सीरीज, त्रिअंगुलार, वेरिएबल, विद्या, वेटेड, वेल्थ बिल्डर, हुल, डबल एक्स्पोनेंशियल, ट्रिपल एक्स्पोनेंशियल यह सारे ऑप्शन मिलेगा लेकिन डिफॉल्ट सिंपल मूविंग एवरेज रहते हैं। बोलिंगर बैंड 3 रेखा के माध्यम से होता है। जैसे बोलिंगर बैंड टॉप जिसको उप्पेर बोलिंगर बैंड कहते हैं, दूसरा बोलिंगर बैंड मीडियम जिसको मूविंग एवरेज के नाम से जाना जाता है और यह मूविंग एवरेज २० पीरियड का रहता है बाय डिफॉल्ट। सेट आप को आप परिवर्तन भी कर सकते हैं अपनी रणनीति के अनुसार , उसके बाद बोलिंगर बैंड बॉटम जो लोअर बोलिंगर बैंड के नाम से जाना जाता है।

बोलिंगर बैंड की विशेषता

बोलिंगर बैंड के ऊपर bollinger bands की जो विशेषता है वह कुछ इस तरीके से हैं जैसे share current price अगर उप्पेर बैंड के नजदीक रहते हैं यहां फिर उप्पेर बैंड को छूते हुए उप्पेर बैंड के ऊपर क्लोज होता है तो उस परिस्थिति में यह माना जाता है यह फिर यह संभावना है के शेयर प्राइस अभी ऊपर जा सकता है, और ऊपर जाने की संभावना ज्यादा है। अगर देखा जाए तो सेकंड कैंडल उप्पेर बोलिंगर बैंड के ऊपर ओपन होगा नहीं तो उप्पेर बैंड को छूते हुए अपनी अपट्रेंड रैली को कंटिन्यू रखेगा Bollinger Band Kya Hai Hindi

दूसरी तरफ से अगर ऐसा होता है जैसे candle closing price उप्पेर बैंड की नीचे क्लोज होता है अर्थात उप्पेर बैंड को breakout करते हुए उप्पेर बैंड के ऊपर stable ना करके उप्पेर बैंड के नीचे क्लोज होता है, उस परिस्थिति में यह माना जाता है, यह फिर संभावना यह होता है कि शेयर प्राइस अभी नीचे गिरेगा। और नीचे गिरने की संभावना ज्यादा है मतलब सेकंड कैंडल upperband के नीचे ओपन होने की संभावना है।

मिडिल बंद की बिशेस्ता भाग-2

अब हम बात करेंगे मिडिल बैंड के ऊपर मिडिल बैंड अर्थात moving average। क्योंकि मिडिल बैंड को मूविंग एवरेज यहां फिर सेंटर लाइन कहां जाता है। शेयर प्राइस जब ऊपर से उप्पेर बैंड को छूते हुए नीचे गिरते हैं उस परिस्थिति में middle band अर्थात सेंटर लाइन सपोर्ट का काम करती है। शेयर प्राइस को नीचे ना गिरने के लिए SUPPORT करते हैं।  और stock future price उस परिस्थिति में सेंटर लाइन को टेस्ट करते हुए ऊपर की तरफ back bounce होता है या नहीं तब शेयर प्राइस ऊपर की तरफ जाने की तैयारी में रहते हैं। सेंटर लाइन को जब शेयर प्राइस छूते हैं तब सेलर profit booking करते हैं और सेंटर लाइन को सपोर्ट मानते हुए buyers वहां से शेयर को बुय करना शुरू करते हैं। जिसके कारण शेयर प्राइस में बैक बाउंस देखने को मिलता है। लेकिन यह भी सत्य है कि ऐसा होना हर बार जरूरी नहीं है कि bollinger band central line को छूने के बाद शेयर प्राइस ऊपर जाएगा। अगर सेलर्स ज्यादा हावी है तो stock price bollinger band center line को तोड़ते हुए नीचे भी जा सकता है।

मिडिल बैंड  विशेषता भाग-3

अब हम बात करेंगे मिडिल बैंड की विशेषता भाग-2 जैसे कि हमने इससे पहले ऊपरी भाग में मिडिल बैंड की support के ऊपर चर्चा किया।अब हम यह देखेंगे जब शेयर प्राइस सेंटर लाइन को तोड़ते हुए नीचे गिरते हैं तब क्या होता है। अगर देखा जाए तो कुछ ऐसा होता है जब शेयर प्राइस सेंटर लाइन को तोड़ते हुए नीचे गिरते हैं और वहां पर कुछ समय तक सेंटर लाइन के नीचे शेयर प्राइस रहते हैं तब सेंटर लाइन resistance का काम करते हैं। ऐसी परिस्थिति में शेयर प्राइस का ऊपर जाना थोड़ा सा मुश्किल का काम होता है। क्योंकि तब sellers हावी होने के कारण index price उस सेंटर लाइन को रेजिस्टेंस मानते हुए नीचे की तरफ गिराने की तैयारी में रहते हैं। और शेयर प्राइस Nifty price bollinger band के lower बैंड को छूने की कोशिश करते हैं। अक्सर ऐसा होता है जैसे banknifty price में इतना गिरावट आता है और लोअर बैंड को टेस्ट करते हैं। Bollinger Band Kya Hai Hindi

लोअर बैंड विशेषता भाग-1

LOWER BAND Bollinger Band Kya Hai Hindi को जानने की कोशिश करते हैं, लोअर बैंड कुछ इस तरह से काम करती हैं चार्ट में जैसे शेयर की वर्तमान राशि अगर लोअर बैंड को पार करते हुए लोहार बैंड के नीचे क्लोज होता है ( lower band breakdown ) तब उस परिस्थिति में ऐसा माना जाता है और intraday trading analysis  यह कहते हैं शेयर प्राइस अभी नीचे गिरेगा। नीचे गिरने की संभावना ज्यादा है। और अगर कुछ ऐसा होता है जैसे उसका विपरीत होता है शेयर प्राइस लोअर बैंड को ब्रेकडाउन करने के बाद दुबारा लोअर बैंड के ऊपर क्लोज होता है तब अक्सर ऐसा होता है सेकंड कैंडल लोअर बैंड के ऊपर ओपन होता है। जहसे से शेयर प्राइस में एक अपट्रेंड  रिवर्सल देखने को मिलता है.

लोअर बैंड विशेषता भाग-2

लोलोअर बैंड की विशेषता भाग दो , जब शेयर प्राइस लोअर बैंड को छूते हुए ऊपर की तरफ जाने की कोशिश करते हैं और शेयर में uptrend reversal बी देखने को मिलते हैं ,तब सेंटर लाइन नीचे से resistance का काम करता है और शेयर प्राइस को बहा से दोबारा नीचे धकेलने में कोशिश करते हैं। ऐसी परिस्थिति में सेंटर लाइन को देखते हुए सेलर्स अगर हावी होता है सेल करने के लिए तो शेयर प्राइस फिर से नीचे गिरते हैं।

बोलिंगर बैंड प्राइस एक्शन भाग 1

बोलिंगर बैंड की प्राइस एक्शन price action से परिचित। बोलिंगर बैंड की माध्यम से किसी भी शेयर की प्राइस एक्शन को समझना बहुत ही सरल है। बोलिंगर बैंड की माध्यम से किसी भी शेयर की जो चाल है उसे आप आसानी से पहचान सकते हैं समय-समय पर।  जैसे शेयर प्राइस में ऊपरी स्तर upper level में तेज गति जब आता है तब उप्पेर बैंड और लोअर बैंड की दूरियां बहुत ज्यादा रहते हैं। अर्थात सेंटर लाइन की और उप्पेर बैंड  की नजदीकी धीरे-धीरे घटने लगता है। ऐसी परिस्थिति में आप प्राइस एक्शन के माध्यम से यह अंदाजा लगा सकते हैं के शेयर प्राइस अभी ऊपर जाने की तैयारी में है। Bollinger Band Kya Hai Hindi

बोलिंगर बैंड प्राइस एक्शन भाग 2

bollinger band की माध्यम से प्राइस एक्शन को ध्यान में रखते हुए आप यह अनुमान कर सकते हैं के शहर प्राइस में अभी क्या हो सकता है। और क्या होने वाला है। जैसे सेंटर लाइन और लोअर बैंड में जब दूरियां बन जाता है तब anakysis यह कहते हैं के अभी share price और भी ज्यादा टूटेगा। टूटने की संभावना ज्यादा है।  क्योंकि शेयर प्राइस में तेज गिरावट के कारण सेण्टर लाइन ( BOLLINGER BAND CENTRAL LINE ) और लोअर बैंड में काफी दूरियां है। अर्थात शेयर प्राइस में जब तेज गति आता है तब सेंटर लाइन bollinger band center lineऔर upper band में डिस्टेंस ज्यादा रहता है। जब शेयर प्राइस में गिरावट आता है सेंटर लाइन और लोअर बैंड में डिस्टेंस ज्यादा रहता है।

बोलिंगर बैंड प्राइस एक्शन भाग 3 सरल भाषा में

प्राइस एक्शन price actionको सरल भाषा में अगर समझे तो कुछ ऐसा होता है जैसे कैंडल की बॉडी उप्पेर बैंड को छूते हुए ऊपर की तरफ जाएगा और उस समय सेंटर लाइन ( MIDDLE BAND ) candlestick से काफी दूर रहेगा। और जब कैंडल स्टिक की बॉडी लोअर बैंड को छूते हुए नीचे की तरफ जाते हैं तब कैंडल की बॉडी और सेंट्रल लाइन में काफी दूरियां देखने को मिलता है। पर ऐसी परिस्थिति में हमें आगाह करते हैं कि अभी शेयर प्राइस गिरेगा। अर्थात stock price जब ऊपर की तरफ जाने की तैयारी में है तो candle body उप्पेर बैंड को छूते हुए ऊपर जाएगा। और अगर शेयर प्राइस को नीचे गिरना है तो कैंडल बॉडी lower band को छूते हुए नीचे गिरेगा।

बोलिंगर बैंड की माध्यम से ट्रेड कैसे करें ?

अब हम यह जानने की कोशिश करेंगे बोलिंगर बैंड की माध्यम से ट्रेड कैसे  कर सकते हैं। बोलिंगर बैंड की माध्यम से हम किसी भी शेयर में ट्रेड कर सकते हैं। ट्रेड अर्थात SHARE को खरीद भी सकते हैं और बेच भी सकते हैं। जैसे अगर हमें शेयर को बाई करना है तो ऐसी परिस्थिति में हमें यह देखना है एक ऐसी कैंडल जो कैंडल उप्पेर बैंड को BREAKOUT करते हुए उप्पेर बैंड के ऊपर क्लोज हुआ। अगर कैंडल उप्पेर बेड के ऊपर क्लोज होता है तो उसका मतलब यह होता है कि वह कैंडल बुलिश कैंडल है। अब हमें इस कैंडल में सिग्नल मिला है शेयर को खरीदने के लिए।

लेकिन शेयर को खरीदने के लिए हमें एक कन्फर्मेशन कैंडल की जरूरत है। जब हमें CONFIRMATION CANDLE मिलेगा तब हम BUY POSITION EXECUTE करेंगे। जैसे फर्स्ट कैंडल उप्पेर बैंड के ऊपर क्लोज होना जरूरी है , सेकंड कैंडल बुलिश होना बहुत ही जरूरी है। यह बुलिश कैंडल  उप्पेर बैंड के ऊपर और पिछले कंडेल की हाई के ऊपर ओपन होना जरूरी है। थर्ड कैंडल अगर सेकंड कैंडल के ऊपर ओपन होता हैं तो थर्ड कैंडल की ओपन प्राइस में बुय पोजीशन एक्सेक्यूटे करेंगे। Bollinger Band Kya Hai Hindi

इस बात को ध्यान में रखना जरूरी है सेकंड कैंडल BULLISH होना चाहिए और सेकेंड के अंदर की क्लोजिंग प्राइस पिछले कंडेल की हाई प्राइस के ऊपर होना चाहिए। सेकंड कैंडल की क्लोजिंग प्राइस अगर पिछले कैंडल की हाई प्राइस के नीचे क्लोज होता है तो उसका मतलब यह होता है कि शेयर प्राइस ऊपर जाने की तैयारी में अभी नहीं है। अगर STOCK PRICE को ऊपर जाना होता तो सेकंड कैंडल की CLOSING PRICE पिछले कैंडल की मतलब फर्स्ट कैंडल की हाई  प्राइस के ऊपर होता अर्थात DEMAND ज्यादा होता बुएरस हबी होता शेयर को खरीदने के लिए।

स्टॉपलॉस और टारगेट

सेकंड कैंडल अगर previous candle की क्लोजिंग प्राइस के ऊपर क्लोज होता है तो हम खरीदेंगे अब TARGET क्या रहेगा और stop-loss क्या रहेगा। सबसे पहले stop-loss के बारे में जान लेते हैं। थर्ड कैंडल में अगर हम बुय करते हैं यानी थर्ड कैंडल की ओपन प्राइस में, तो हमारा stop-loss रहेगा फर्स्ट कंफर्मेशन जो कैंडल था उस कैंडल की low price के निचे। और टारगेट हम ओपन रख सकते हैं  यानि share price जब ऊपर की तरफ जाएगा तब हम एग्रेसिव स्टाइल में current price में फ्लैक्सिबल टारगेट बुक कर सकते हैं। फिर से याद दिलाना चाहूंगा बुय करने के लिए दो कैंडल बुलिश होना जरूरी है। और दोनों कैंडल upper band के ऊपर क्लोज होना चाहिए। थर्ड कैंडल की ओपन प्राइस में हम बाय करेंगे। नोट करने वाली विशेषता यह है सेकंड कैंडल की क्लोजिंग प्राइस फर्स्ट कंजेल की हाई प्राइस के ऊपर होना जरूरी है।

टाइम फ्रेम की बिश्लेषों / टाइम फ्रेम और फालसे सिग्नल से बचना

अब हम बात कर रहे हैं time frame। बोलिंगर बैंड के माध्यम से intraday trading करने के लिए अर्थात शेयर को खरीदने और बेचने के लिए अलग-अलग टाइमफ्रेम को हम उपोयग कर सकते हैं। अलग अलग टाइम फ्रेम की सहायता से एक अच्छी ट्रेड इनीशिएट कर सकते हैं। डे ट्रेडिंग ( day trading ) में यानि इंट्राडे ट्रेडिंग में ट्रेड करने के लिए Time Frame खास करके 15 मिनट और 30 मिनट को उपोयग कर सकते हैं। 15 मिनट में हमें सिग्नल कुछ ज्यादा मिलेगा 30 मिनट की TIME FRAME की तुलना में। 15 मिनट की timeframe में हमें फॉल्स सिग्नल भी मिल सकते हैं ,15 मिनट की टाइम फ्रेम में अगर 1 दिन में उदाहरण के लिए कहना चाहूंगा अगर दो false signal मिलता है दूसरी तरफ 30 मिनट टाइम फ्रेम में false सिग्नल ना मिलने की संभावना ज्यादा रहता है। तो  हमें 15 मिनट की TIMEFRAME के साथ साथ 30 मिनट को भी चार्ट में अप्लाई करके देखना जरूरी है कि अभी कौनसी टाइम फ्रेम में हमें strong signal मिल रहा है और उसी के माध्यम से trade कर सकते हैं।

शेयर कैसे बेचे

अब हम बात करने जा रहे हैं selling position कैसे इनीशिएट कर सकते हैं किसी भी शेयर को बोलिंगर बैंड के मध्यम से।  सेल करने के लिए एक ऐसा कैंडल मिलना जरूरी है, एक ऐसा कैंडल जो कैंडल बेयरिश है और lower band के नीचे ओपन हुआ है।  तो यह कंडल first confirmation candle होगा, सेकंड कैंडल फर्स्ट कंडल के क्लोजिंग के निचे होना जरूरी है, और कैंडल बेयरिश होना भी जरूरी है।  सेकंड  कैंडल अगर फर्स्ट कैंडल के नीचे ओपन होकर फर्स्ट कैंडल के नीचे क्लोज होता है तो हमें यहां पर सेकंड कन्फर्मेशन कैंडल मिला। अब थर्ड कैंडल की ओपन प्राइस में सेलिंग पोजीशन इनीशिएट कर सकते हैं। Bollinger Band Kya Hai Hindi

सेल पुष्टीकरण

Bollinger Band Kya Hai Hindi के माध्यम से sell करने के लिए दो confirmation candle होना जरूरी है। दोनों candle bearish होना जरूरी है, दोनों कैंडल की closing price लोअर बैंड के नीचे होना चाहिए तब थर्ड कंडल की open price में सेल करेंगे।

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